शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

डिअर व्हाटसअप/ फेसबुक

डिअर व्हाटसअप/ फेसबुक ,
तुम हर दिन हर पल 24 घंटे मैसेज को बिना रुके एवं बिना थके भेजने और लेने का काम करते हो  । टेक्स्ट , चित्र और ऑडियो वीडियो ,यंहा तक की आजकल  तुम्हे  पीडीएफ और डॉक्यूमेंट फ़ाइल से भी परहेज नही है । सोते जागते आजकल तुम हमेशा हमारे साथ रहने लगे हो , यंहा तक की खाते पीते वक्त एवं कई गैर जरुरी कामों मेँ भी तुम्हारा साथ नही छूट रहा है ।
तुम्हारा और हमारा साथ अभी तक तो बहुत ही खुशनुमा चल रहा था । लेकिन ऑफिस के बॉस के आर्डर वाले मेसेज ने हमारी दोस्ती में दरार डालनी शुरू कर दी है । आजकल तुम्हारे साथ से डर लगने लगा है , जब भी कोई भी घंटी बजती है ना,  तो उलझन में पड़ जाते है की कही बॉस का मेसेज तो नही । सुकून वैसे भी छिनने लगा , अब न तुम्हारे साथ बोरियत भी होने लगी है । अरे क्या ! बार बार एक ही मेसेज लाते रहते हो । तुम इसे रोकते क्यों नही ।
तुम्हारे कारण ना कुछ् नया सोचने की आदत जाने लगी है , बस क्या अच्छा सा बधाई और शुभकामना सन्देश झट से कॉपी पेस्ट कर पोस्ट कर रिश्तों की जिम्मेदारी की इतिश्री करने लगे है । दोस्तों की लिस्ट भी ना , इतनी लम्बी हो गई है की सबके मेसेज देखते देखते गर्दन दर्द होने  लगती है । आँखों और दिमाग पर भी कुछ ज्यादा ही जोर पड़ने लगा है । है भगवान् ! कंही तुम्हारे चक्कर मेँ डॉक्टर के चक्कर न लगाने पड जाये । कुछ भाई लोग तो अपना काम धंदा और पढाई लिखाई छोड़कर बस तुम्हारे चक्कर में अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे है ।
फिर भी अब तो तुम हमारे जीवन का ख़ास हिस्सा बन गए हो । तुमसे दूर तो नही जा सकता , हाँ कोशिश जरूर करूँगा की तुमसे अब कम मिलु ।
तुम्हारा दोस्त : दीप ।

2 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

अच्छा किया जो व्हाट्सअप और फेसबुक के नाम ये चिट्ठी आपने ब्लॉग पर लिखी | सच कहा आपने हाल और हालत तो असल में इससे भी बुरे हैं | बहतु सुन्दर पोस्ट

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

अजय जी , आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद ।