बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

कभी कभी एक 'न' भी .......!


करनी चाहिए मदद अपनों की जरुरत पर हर दफा ।
जरुरी है अपनों की खुशियों का ध्यान रखना सदा ।
पर हर बात पर नही मिलायी जा सकती हाँ में हाँ ।
कभी यही आदत बन जाती है परेशानी भरा जहां।
ये सोचकर कि इंकार न कर जाये अपनों को खफा ।
और ढोते रहते हैं बोझ उस हाँ का बुझे मन से हमेशा ।
बातें जो करे असहज लम्हा , उन्हें करना सीखें मना ।
कभी कभी एक 'न' भी  ,  आसान कर देगी जीना । 

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

यह #जरुरत का #तकाजा है या #जीवन की #मज़बूरी !


चल पड़ता हूँ सफ़र पर एक अजनबी के साथ ,
अपनी मंजिल पर पहुचने के लिए ।
ठहर जाता हूँ एक रात अनजान सराय पर ,
दिन भर की थकान मिटाने के लिए ।
खरीद लाता हूँ सामान नुक्कड़ की दुकान से ,
तुरंत की भूख और प्यास मिटाने के लिए।
पहुच जाता हूँ एक अनजान वैध के पास ,
बीमार और बिगड़ी सेहत सुधरवाने के लिए ।
सौप देता हूँ बच्चों को कुछ अनजान हाथों में ,
पढ़ा लिखाकर भविष्य सवारने के लिए ।
यह जरुरत का तकाजा है या जीवन की मज़बूरी,
अनजान शख्स पर विश्वास करना हो गया जरुरी ।
जो भी हो 'दीप' जीवन के लिए सबका साथ जरुरी ।
इन सबके बिना यह खूबसूरत जिंदगी है अधूरी।

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

#साहिल पर तो आये #रिश्तों की #कश्तियाँ ।

#साहिल पर तो आये #रिश्तों की #कश्तियाँ ।

यूँ ही अनजाने में जो कर बैठे हैं गुस्ताखियाँ ।
अब तो बढ़ चले हैं  फासले और रूसवाइयां ।
कुछ तो कम हो ये पल पल सताती दुशवारियाँ।
आओ तोड़े अब ये चुप्पी और खामोशियाँ ।
दूर करें ग़लतफ़हमी जो है तेरे मेरे दरमियान ।
न हो सकें सुलह ऐसी तो न होगी मजबूरियां ।
कुछ तुम तो कुछ हम बढ़ें छोड़कर गुमानियां ।
साहिल पर तो आये 'दीप ' ये रिश्तों की कश्तियाँ ।

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

आपसे #अकेले में #बात करनी है !


सपनों के पीछे भागती भीड़ से परे ,
जहां कोई व्याकुल कोलाहल न करे ,
जहाँ कोई सफलता का अभिमान न धरे ,
जहाँ निश्चल मन की मासूमियत न मरे ,
अनुकूल  वातावरण में फैले क्षितिज के तले , 
आपसे अकेले में बातें करनी है !
कभी रोज की दौड़धूप से फांका तो करो ,
सपनों की दुनिया से बाहर  झाँका तो करो ,
मैं क्या चाहती हूँ कभी आँका तो करो ,
कुछ पल साथ बिताने का वादा तो करो ,
अपना सुख दुःख 'दीप' साथ साझा तो करो ,
आपसे अकेले में बात करनी है !

मंगलवार, 9 जनवरी 2018

तेरी फ़िक्र इस कदर किये जाते है !


तेरी फ़िक्र इस कदर किये जाते है ,
जहां भी जायें तेरा जिक्र किये जाते हैं ।
महफ़िलों का दौर है सजा , जाम पर जाम है छलका ।
इस हंसी दौर में तेरे होने की ख्वाइश  किये जाते है ।
             तेरी फ़िक्र इस कदर किये जाते है ,..............|
कुछ तो है तेरे नाम का नशा , हर जगह है तेरी ही सदा ।
तेरा नाम आते ही दिल अरमानो की बारिश किये जाते हैं ।
              तेरी फ़िक्र इस कदर किये जाते है ,..............|
जब तक साथ न हो तेरा , रहता है मायुसी का बसेरा ।
हर पल तेरे होने की 'दीप' दिल ये साजिश किये जाते है ।
               तेरी फ़िक्र इस कदर किये जाते है ,..............|
                

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

काश तेरे होने की होती कद्र !


जब तक थे तुम साथ तुम्हारे होने की न हुई कद्र।
तेरे न होने पर समझ आई तेरी अहमियत।
साथ चलते रहे कदम कभी न किया कोई फ़िक्र ।
तेरे जाने के बाद समझ आई तेरी काबिलियत।
यूँ ही मिलते रहे रोज, कभी न मनाया  शुक्र।
तेरी कमी से रिश्तों की समझ आई असलियत ।
सुनते रहे ख़ामोशी से हर बात कभी न किया जिद।
तेरी यही अदा में समझ आई तेरी हंसी शख्सियत।
उफ़ तक न किया हर वजह पर रखा किया सब्र ।
ऐसे सादगी भरे चेहरे में नजर आई तेरी मासूमियत।
जो है अपने पास 'दीप',साथ और सम्मान से करें कद्र।
इसमें ही खूबसूरत जिंदगी की समाई है सहूलियत ।



रविवार, 17 दिसंबर 2017

#कम न हो #नये की #चाहत ।।


#कम न हो #नये की #चाहत ।।
कुछ अलग और नये की चाहत , पुराने से ऊबने और उबरने की चाहत । 
तो कर गुजरते है कुछ अलग ,मिलती तसल्ली और होती है राहत ।
छूटते है अपने और  होते आहत , कुछ टुटता है बिखरती है सहूलियत । 
जब चल पड़ते करने को कुछ अलग ,होती है ख़ुशी हर लम्हा सुखद । 
उड़ती है नींदे होती कड़ी मेहनत ,बढ़ती दुस्बारियाँ बिगड़ती है सेहत ।
तन मन की लगती है लागत ,लगती राहें आसान हर पल खूबसूरत । 
चलते रहें  न हो कहीं थकावट , कुछ परेशानी कुछ तो होगी रूकावट ।
कम न हो नये 'दीप' की चाहत ,यही तो जीवन का फलसफा है शायद ।