शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

क्या मिलेगा #बेटियों को #खिलखिलाता और #सुरक्षित #जहान !


आज एक मासूम का सुरक्षित नहीं है मान सम्मान और जहान।
आखिर बेटियों को क्यों शिकार बना रहा है  हर उम्र का इंसान।
क्या हमारी सामाजिक व्यवस्था का धवस्त हो रहा है तान बान।
या आज के माता पिता नहीं बना पा रहें बच्चों को संस्कारवान|
क्या नंबरों की होड़ वाली शिक्षा व्यवस्था का भी है कुछ योगदान।
या जिम्मेदार है परोसे जा रहे फूहड़ता और अश्लीलता के सामान।
या जिम्मेदार है कमजोर कानून ,देर से मिलता न्याय व दंड विधान।
या इन सब से उपजी विकृत सोच और मानसिकता का है परिणाम।
क्या मिलेगा इस भयावह और घृणित समस्या का समाधान।
क्या मिलेगा बेटियों को खिलखिलाता, सुरक्षित 'दीप' जहान।
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रविवार, 15 अप्रैल 2018

कब तक ज्यादिती# की बेदी# पर बेटी# चढ़ती रहेगी रोज!

कब तक ज्यादिती# की बेदी# पर बेटी# चढ़ती रहेगी रोज।

जन्म से पहले ही तो सुरक्षित नहीं थी माँ की कोख ।
दुनिया में आने से पहले अपने ही लगा रहे थे रोक ।
जैसे तैसे इस दुनिया में बेटी ने जन्म लिया एक रोज ।
क्या पता पहले से ही ताक पर बैठे मिलेंगे दरिंदे लोग ।
किस से बचाये अपने को न जाने किसके मन में खोट ।
न जाने  कब  कौन सा साथी कब खो दे अपने होश  ।
गलती नहीं होने पर भी अपनी  हर बार सहती चोट ।
न जाने कब तक लेना होगा अपने सर माथे सारा दोष ।
रोक सका न शोषण अब तक कानून व् केंडल विरोध ।
इतने पर ही  इतिश्री कर क्यों सिल जाते सब के होंठ ।
कब तक उपभोग की वस्तु समझने की न बदलेगी सोच ।
कब तक ज्यादिती की बेदी पर बेटी चढ़ती रहेगी रोज ।
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बुधवार, 4 अप्रैल 2018

तय# होते रहें सफ़र# ए जिंदगी# !

तय# होते रहें सफ़र# ए जिंदगी# !

कुछ की गोद में है खेले ,कुछ की ऊँगली पकड़ चलना सीखे ।
तो कुछ सीख देकर चले गए,तय होते रहें सफ़र ए जिंदगी ।
कोई कम उम्र में ही छूटे,तो किसी के जीवन बहुत लंबे बीते ।
एक एक कर  साथ छुटे , तय होते रहें सफ़र ए जिंदगी ।
किसी से अपने थे रूठे, तो किसी को अपनों ने दिये धोखे ।
रूठ कर दुनिया से चले गए,तय होते रहें सफ़र ए जिंदगी ।
किसी का अभाव में जीवन बीते,किसी का बीमारी से चैन लुटे।
संघर्ष करते जीवन है छूटे ,तय होते रहे सफ़र ए जिंदगी ।
किसी को कुछ पता है न जाना है ,जीवन के नहीं है भरोसे ।
जब तक है जान हो बेफिक्र , जलते रहें 'दीप' ए जिंदगी ।
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बुधवार, 28 मार्च 2018

अब तो #इंतज़ार में ही #नफा है !

अब तो #इंतज़ार में ही #नफा है !

गुजर जाते हैं हर बार सामने से नजर मिला न सका है ।
वो भी तो कभी कुछ कहते नहीं न जाने क्या रजा है ।
कह  सकूँ दो बातें उनसे  कोशिश भी की कई दफा  है ।
मेरी  नादानियां कहीं ऐसे ही उन्हें  कर न दे खफा है ।
नाराजगियां उनकी कहीं  यूँ  ही न बन जाये सजा है ।
वापिस खीच लेता  हूँ कदम कहीं हो न जाये खता है ।
समझ न सके हाले  वफ़ा वो  इतनी तो नहीं नादां है ।
हो नजरें इनायत उनकी अब तो इंतज़ार में ही नफा है ।
सुकूँ अहसासों के लिए 'दीप' करते ख़ुदा का सजदा है ।
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गुरुवार, 22 मार्च 2018

दिल# में न जाने कितने गम# छुपाये रखे सीने# में !

दिल# में न जाने कितने गम# छुपाये रखे सीने# में ।



यहाँ मिलता है हर शख्स मुस्कराहट के साथ,
दिल में न जाने कितने गम छुपाये रखे सीने में ।
लड़ता है वक्त बेवक्त आती परेशानियों के साथ ,
मशरूफ हो जाता कुछ इस तरह जिंदगी जीने में ।
मिलता है मौका तो खुश हो लेता हैं अपनों के साथ ,
हौसले यूं ही कम न हुये परेशानियों के पसीने में ।
ढ़ूढ़ते रहते हैं हल मुसीबतों का समाधानो के साथ ,
कभी मंदिर मस्जिद तो कभी मयखानों के पीने में ।
संघर्ष करते 'दीप' हैं अच्छे दिनों की उम्मीदों के साथ,
बमुश्किल होती है चार दिन की चांदनी साल महीने में ।
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शुक्रवार, 16 मार्च 2018

और न ही हमारा आँगन परिंदों का ठिकाना ही रहा !


न फूलों की रंगीनी रही न ही खुशबु रही ,
न ही वो ठंडक लिए खुशनुमा मौसम सुहाना ही रहा ।
न तो फूल और न ही क्यारियां रही ,
और न ही  हमारा आँगन परिंदों का ठिकाना ही रहा ।
न तो वक्त है और न ही वो जगह रही,
कहाँ वो पंछियों के दानापानी देने का जमाना ही रहा ।
जो बची थी आसपास थोड़ी जगह ,
वो आजकल कबाड़ और वाहनों का आशियाना ही रहा ।
काश बचा लेते इनके लिए जगह और समय ,
वर्ना बाद पछताने का 'दीप' यही एक बहाना ही रहा ।

शनिवार, 10 मार्च 2018

खिचे# चले आते हैं तेरीओर# ,जरूर तुझमे ऐसी हंसी# अदा# है!

खिचे# चले आते हैं तेरीओर# ,जरूर तुझमे ऐसी हंसी# अदा# है!

मिल ही जाते हो यूँ ही जब तब,क्या तेरा मेरा कोई वास्ता है ।
बढ़ने लगी है गुफ्तगू रोज,फिर भी कहने को और बचा है ।
खिचे चले आते हैं तेरी ओर ,जरूर तुझमे ऐसी हंसी  अदा है ।
एक सुकून देता है तेरा साथ,लगता है तू कोई इक फरिश्ता है ।
मुलाकातों से भरता नहीं दिल,यादों का ही रहता आसरा है ।
तेरी ही फ़िक्र में रहते है अब तो,बन गया है ये कोई रिश्ता है ।
तमन्ना है रब से अब 'दीप' यही,हो जाये एक तेरी मेरी सदा है ।

क्या मिलेगा #बेटियों को #खिलखिलाता और #सुरक्षित #जहान !

आज एक मासूम का सुरक्षित नहीं है मान सम्मान और जहान। आखिर बेटियों को क्यों शिकार बना रहा है  हर उम्र का इंसान। क्या हमारी सामाजिक व्यवस...