रविवार, 17 दिसंबर 2017

#कम न हो #नये की #चाहत ।।


#कम न हो #नये की #चाहत ।।
कुछ अलग और नये की चाहत , पुराने से ऊबने और उबरने की चाहत । 
तो कर गुजरते है कुछ अलग ,मिलती तसल्ली और होती है राहत ।
छूटते है अपने और  होते आहत , कुछ टुटता है बिखरती है सहूलियत । 
जब चल पड़ते करने को कुछ अलग ,होती है ख़ुशी हर लम्हा सुखद । 
उड़ती है नींदे होती कड़ी मेहनत ,बढ़ती दुस्बारियाँ बिगड़ती है सेहत ।
तन मन की लगती है लागत ,लगती राहें आसान हर पल खूबसूरत । 
चलते रहें  न हो कहीं थकावट , कुछ परेशानी कुछ तो होगी रूकावट ।
कम न हो नये 'दीप' की चाहत ,यही तो जीवन का फलसफा है शायद ।

रविवार, 10 दिसंबर 2017

#बारात के दो #दृश्य !


मस्तियाँ और खुमारियों का छाया है आलम ,
रंग बिरंगी रोशनियाँ से बरात ए जश्न है रोशन ,
अपनी पसंद की बाराती बजवा रहे है धुन ,
बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों के थिरके है कदम ।
बरातियों के नकारात्मक व्यवहार  से न होकर खिन्न  ,
हो पसीने से तरबतर बजा रहे है हर पसंदीदा धुन ,
बिजली के तारों से झूलते रोशनियों के सामान ,
रख  बच्चे,महिलाएं और बुजुर्ग बढ़ा रहे हैं कदम ।
यहाँ एक पल के मायने हर जिंदगी के  लिए है भिन्न ।
कोई  खुशियाँ मनाता है तो किसी के संघर्षों का है क्षण ।

बुधवार, 6 दिसंबर 2017

अलाव से गर्मी का पाया सुरूर .


दिन भर की कड़ी मेहनत से थक कर चूर ,
शाम ढलते ही सभी चिंताओं से दूर ,
कर रहें है सब मिलकर सामना भरपूर ,
ठण्ड जो कुछ ज्यादा ही हो रही क्रूर ।
तन पर गर्म कपड़े लिबास नही है प्रचुर ,
जो बेशक फुटपाथ पर रहने को है मजबूर ,
जलाकर अलाव से गर्मी का पाया सुरूर ,
आग की लौ से चेहरे पर सुकूँ का है नूर ।
कहते सुनते रात गुजर रही है बदस्तूर ,
बिना कुछ सोचे की किसका है ये कसूर ,
कभी तो दीप मेहरबाँ होगी किस्मत मगरूर ,
अगली सुबह खुशियों से भरी होगी जरूर ।

बुधवार, 13 सितंबर 2017

प्रभाव या अभाव - मासूमों का बचपन कुचलने पर आमादा ।


यह इंसान की  पतित विकृत मानसिकता का प्रभाव है ,
या भौतिकवादी इंसान की नैतिक सोच का आभाव ?
यह धड़ल्ले से परोसी जा रही अश्लीलता का प्रभाव है ,
या इंसान के अच्छे बुरे में अंतर की सोच का आभाव ?
यह मन में सुलग रही हवस की चिंगारी का प्रभाव है ,
या मन की अनैतिक इक्च्छाओं पर नियंत्रण का आभाव ?
जो मौका पाते ही  इंसान को वहशी दरिंदा और हैवान बना कर ,
इस देश के नोनिहालों का शोषण और उत्पीड़न  करवा रही है |
असुरक्षित और भययुक्त वातावरण निर्मित कर ,
एक मासूम का खिलखिलाता बचपन कुचलने पर आमादा कर रही है ।

रविवार, 13 अगस्त 2017

आज़ादी के अपने मायनों का जहान !


आज़ादी के अपने मायनों का जहान,  मेरा प्यारा हिन्दुस्तान ।
कोई देश के लिए जी जी जान से लड़ता ,
कोई देश के खिलाफ जहर उगलता ।
कोई अपने कर्तव्यों पर खरा उतरता ,
कोई सिर्फ अपने हकों के लिए लड़ता ।
कोई अभावों में भी खुश रह जाता ,
किसी को सब कुछ मिलने पर भी डर सताता ।
फिर भी मेरा देश महान , सदा अमर है मेरा हिन्दुस्तान ।

सोमवार, 7 अगस्त 2017

🌹🌷शुभ एवं मंगलमय रक्षाबंधन । 🌺🙏


💐भाई- बहिन के अपार  स्नेह और अटूट बंधन के पावन पर्व की कोटिशः बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं । 💐

🌹🌷शुभ एवं मंगलमय रक्षाबंधन । 🌺🙏

सोमवार, 24 जुलाई 2017

खुलकर मुस्कुराने दो हमें ।


खुलकर मुस्कुराने दो हमें ,
न दबे बचपन किताबों के बोझों  के  तले ।
फूलों की तरह खिलने दो हमें ,
न झुलसे  मासूमियत  बड़ों के अरमानों के तले ।
बातें करने दो  आसमानों से हमें ,
न गुजरे ये बचपन चाहरदीवारों के तले  ।
भीग जाने दो बारिश में हमें ,
न रोको लेने दो मौसम के खुलकर मजे ।
न डालो इतनी जिम्मेदारियां हमें ,
कहीँ  खो ना जाये बचपन वक्त से पहले ।
जी लेने दो जीभर बचपन हमें  ,
फिर तो बीतने ही है संघर्ष से जिंदगी के हर लम्हे ।